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यही तो जीवन है

 मनुष्य के जीवन में हमेशा चिंता बनी ही रहती है | चाहे वो जिम्मेदारियों को लेकर हो या फिर दुनियादारी को लेकर  जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य अपनी  जरूरतों को पूरा करने में लगा रहता शायद वो स्वंय को भूल जाता है  मैं अपने जीवन के अनुभवों से यह परखा हूँ ,की सभी अपनी तुलना एक-दुसरे से करने में लगे रहते हैं | बचपन नादानी में बीतती है , जवानी संघर्षों में और बुढ़ापा खुद खोज में या फिर योग में इसी का तो नाम जीवन है | खुद को जाने का मौका हमें अंत में क्यों दिया जाता है : क्या इसलिए क्योंकि हम पुरे परिपक्व नहीं होते | यह भी एक सवाल बन कर रह गया है , मनुष्य के जीवन में  मित्र अपने मित्रों को कहें याँ फिर दुःख-सुख को पूरे  जीवन इसी चीज़ का फैसला नहीं कर पाते बस खुद को संलग्न रखते हैं जीवन के प्रति यही तो जीवन है |

स्वभाव अपना -अपना

आँगन छोटा हो या बड़ा आँगन तो आँगन होता है  परिवार छोटा हो या बड़ा परिवार तो परिवार होता है  जिन्दगी छोटी हो या बड़ी जिन्दगी तो जिन्दगी होती है  नाम बड़ा हो या छोटा नाम तो नाम होता है  इम्तिहान छोटा हो या बड़ा इम्तिहान तो इम्तिहान होता है  संघर्ष छोटा हो या बड़ा संघर्ष तो संघर्ष होता है सफलता छोटी हो या बड़ी सफलता तो सफलता होती है मदद छोटी हो या बड़ी मदद तो मदद होती है  वक़्त छोटा या बड़ा वक़्त तो वक़्त होता है यादें छोटी हो या बड़ी यादें तो यादें होती है दुःख छोटा हो या बड़ा दुःख तो दुःख होता है खुशियाँ छोटी हो या बड़ी खुशियाँ तो खुशियाँ होती हैं