वर्तमान समय में हिंदी भाषा में उतार चढ़ाव
भारत देश का नाम सुनते ही हमारे मस्तिष्क में हिन्दी भाषा का नाम गूँज उठता है। इस बात का इतिहास भी गवाह है कि हिंदी भाषा का वर्चस्व हमेशा से ही भारत देश में रहा है। भारत देश की पहचान हिंदी भाषा से ही होती है। भारत देश में विभिन्न जाति, धर्म के लोग रहते हैं परन्तु जब एकता की बात आती है तब एक हिंदी भाषा के ही माध्यम से हम भारतीय अपना परिचय देते हैं। कुछ वर्षों से हिंदी भाषा में हमे काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है। यदि हम अपने वतन से कहीं दूर दराज में रहते हैं अपने किसी निजी कारणों से या फिर अन्य कई कारणों से अगर उस जगह हमें हिंदी सुनने को मिले तो ऐसा लगता है जैसे जीने की इच्छा ही बढ़ गई हो। अपने राष्ट्रीय भाषा सुनते ही एक अपनापन की भावना हृदय में उत्पन्न हो जाती है। कहीं न कही हम अपने भाषा को एक अहम तबज्जो देते हैं। हर एक राष्ट्र की अपनी राष्ट्रीय भाषा एक मर्मस्पर्शी भाषा के रूप में उभर कर सामने आती है। दिन प्रतिदिन हम अपने राष्ट्रीय भाषा को न तबज्जो देते हुए बल्कि अंतरराष्ट्रीय भाषा या फिर सम्पर्ककीय भाषा को तब्बजो दे रहे हैं। अगर हम समय के माँग कि दृष्टि से देखें तो यह पहलू हमे सही स...