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Showing posts from 2020

वर्तमान समय में हिंदी भाषा में उतार चढ़ाव

भारत देश का नाम सुनते ही हमारे मस्तिष्क में हिन्दी भाषा का नाम गूँज उठता है। इस बात का इतिहास भी गवाह है कि हिंदी भाषा का वर्चस्व हमेशा से ही भारत देश में रहा है। भारत देश की पहचान हिंदी भाषा से ही होती है। भारत देश में विभिन्न जाति, धर्म के लोग रहते हैं परन्तु जब एकता की बात आती है तब एक हिंदी भाषा के ही माध्यम से हम भारतीय अपना परिचय देते हैं।  कुछ वर्षों से हिंदी भाषा में हमे काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है। यदि हम अपने वतन से कहीं दूर दराज में रहते हैं अपने किसी निजी कारणों से या फिर अन्य कई कारणों से अगर उस जगह हमें हिंदी सुनने को मिले तो ऐसा लगता है जैसे जीने की इच्छा ही बढ़ गई हो। अपने राष्ट्रीय भाषा सुनते ही एक अपनापन की भावना हृदय में उत्पन्न हो जाती है। कहीं न कही हम अपने भाषा को एक अहम तबज्जो देते हैं। हर एक राष्ट्र की अपनी राष्ट्रीय भाषा एक मर्मस्पर्शी भाषा के रूप में उभर कर सामने आती है। दिन प्रतिदिन हम अपने राष्ट्रीय भाषा को न तबज्जो देते हुए बल्कि अंतरराष्ट्रीय भाषा या फिर सम्पर्ककीय भाषा को तब्बजो दे रहे हैं। अगर हम समय के माँग कि दृष्टि से देखें तो यह पहलू हमे सही स...

बाढ़ एक समस्या

जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि इस पूरे विश्व का 70℅ भाग जल है और 30℅भाग भूमि है।  हम यहाँ पीने की पानी की बात नहीं कर रहे, जल के कुल 70℅ भाग जो कि सामान्य पानी है उसकी बात कर रहे हैं। हम भारत देश के रहने वाले हैं। यहाँ जल की पर्याप्त व्यवस्था है। बरसात के मौसम में यहाँ अच्छी बारिश भी होती है। जिससे यहाँ की खेती सुव्यवस्थित ढंग से हो पाती है। अच्छे फसल उगाने में भारत की नदियाँ सहायक होती हैं। भारत की कुछ प्रमुख नदियाँ है- गंगा, यमुना सतलुज ब्रह्मपुत्र आदि । जहाँ ये नदियाँ देशवाशियों के लिए एक सरल एवं सहज साधन के तौर पर हमें देखने को मिलता है वहीं कहीं इन नदियों का आक्रमक रूप भी देखने को मिलता है। ज्यादातर बरसात के मौसम में ये नदियाँ अपना भयंकर रूप ले लेती हैं। जल ठहराव के उचित साधन अपर्याप्त होने के कारण एवं उचित बांध ना होने के कारण सभी देशवासियों को बाढ़ एक जटिल समस्या का सामना करना पड़ता है। देश के निचले प्रदेशों में अधिकांश यह समस्या देखने को मिलती है। इतना ही नहीं पड़ोसी देश भी अधिक मात्रा में जल जमाव होने के कारण पानी को बेफिक्र अपने आसपास के प्रांतों में छोड़ देते हैं। जिस कारणव...

मानव जीवन मे प्रेम का महत्व..

मानव जीवन भगवान का दिया हुआ,एक अभिन्न भेंट है। ईश्वर ने अपने कलाकृतियों में से मनुष्य अर्थात मानव प्रजाति को अत्यंत ही विवेकशील एवं रोचक रुप दिया है। मनुष्य समाजरूपी वातावरण में रहकर एक-दूसरे से बातचीत करना,एक-दूसरे की सहायता करना, एक-दूसरे के सुख-दुःख साथ देना, एक-दूसरे से घृणा करना एवं एक-दूसरे से प्रेम करना। यह तमाम चीजें अर्थात आचरण मनुष्य समाज में लोगों के बीच रहकर सीखता है। जिनमें से केवल प्रेम ही मनुष्य के आचरण, व्यवहार एवं जीवन-शैली को अत्यधिक प्रभावित करता है। वर्तमान समय के इस प्रतियोगितारूपी जीवन में मनुष्य केवल अपने प्रेम, लग्न एवं मेहनत से अपने कठिन से कठिन कार्य आसानी से पूरा कर लेता है। प्रेमतारूपी स्वर को सभी सुनना पसंद करते हैं, परन्तु जो व्यक्ति समाज में रहकर लोगों से प्रेमता से पेश नहीं आते। उन्हें अक्सर निराशा ही हाथ लगती है। प्रेम रूपी सागर में सभी डूबना चाहते हैं, परंतु घृणारूपी वातावरण में कोई व्यक्ति नहीं रहना चाहता। वर्तमान समय में प्रेम एवं मधुरता से हर व्यक्ति अपने जटिल से जटिल कार्य किसी अन्य व्यक्ति की मदद से आसानी से करवा लेता है। साहित्य के कवियों ने...