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Showing posts from 2019

जीवन एक श्यामपट्ट

    जैसा कि हम सभी जानते हैं,कि अधिकांश मनुष्य का जीवन दीर्घायु नहीं होता परन्तु संघर्षशील, सुखद एवं दुखद जरूर होता है। मनुष्य के जीवन में सुख एवं दुखों का उतार चढ़ाव होना तो मनुष्य जीवन का एक अनमोल रिश्ता है। सुख एवं दुख के कारण ही हर मनुष्य अच्छे एवं बुरे वक़्त से रूबरू हो पाता है। मनुष्य का जीवन एक रिक्त श्यामपट्ट की भांति होता है। इसे हम मनुष्य मनुष्य जीवन काल रेखा या फिर मनुष्य जीवनी रेखा भी कह सकते हैं। मनुष्य अपने अच्छे एवं बुरे कर्म इसी जीवनरूपी श्यामपट्ट के ऊपर पूरा करता है। यदि कोई मनुष्य अपने जीवनरूपी श्यामपट्ट पर अच्छे कर्म करता है ,तो उसे अपना रास्ता सफल एवं प्रकाशमय दिखाई देता है,परन्तु जो मनुष्य अपने जीवनरूपी श्यामपट्ट पर बुरे कर्म करता है तो उसे अपना रास्ता असफल एवं अंधकारमय दिखाई देता है। यह सत्य है ,कि कर्मों के फल की प्राप्ति मनुष्य के वश में नहीं होता परन्तु इतना तो सत्य है कि अच्छे एवं बुरे कर्म करना मनुष्य के वश में ही होता है। अर्थात मनुष्य को अपने जीवनरूपी श्यामपट्ट के रिक्त स्थानों की पूर्ति अपने अच्छे कर्मों के माध्यम से करनी चाहिए। जब एक छोटे शिशु क...

मानव जीवन

मानव जीवन का महत्व केवल अपने कर्तव्यों का पालन करना ही नहीं है,बल्कि असली मनुष्यता तो जन स्नेह, जन परोपकार, एवं जन सेवा ही है। दूसरों का परोपकार करना ही मानव जीवन का मूल आधार है। जब किसी माँ के गर्भाशय से एक शिशु का जन्म होता है। उस दौरान वह शिशु दुनिया की माया से वंचित रहता है, परन्तु हम कह सकते हैं, कि वह शिशु लालचरहित, ईर्ष्यारहित, क्रोधरहित होता है, परन्तु आयु बढ़ने के साथ-साथ उस बालक में क्रोध, लालच, ईर्ष्या इत्यादि का संचार भी बढ़ने लगता है। हम कह सकते हैं, कि हमें भगवान के घर से एक अच्छे इंसान के रूप में भेजा जाता है, परन्तु  हम इस दुनिया में आते ही विभिन्न प्रकार की बुरी संगतों में जकड़ जाते हैं। जब किसी मनुष्य के जीवन में कुछ बुरा होता है,तो वह ईश्वर को जिमेवार ठहराते हैं, परन्तु उसे यह नहीं पता कि वह अपने परिस्थितियों का खुद जिम्मेदार है। भगवान के घर से हमें एक अच्छे इंसान के रूप में भेजने के बाबजूद भी हम उनके नियमों का उल्लंघन करके माया का साथ देने लग जाते हैं। इन सभी रास्तों के अनुसरण करके ही मनुष्य अपनी मनुष्यता का पतन करवाने लग जाता है। विभिन्न बुजुर्गों एवं विद्वानो...

जिन्दगी एक संघर्ष

कहा जाता है,की मानव जीवन भाग्यशाली को ही प्राप्त होता है,परन्तु देखा जाए तो वास्तव में हमें अपने कर्मों की ही प्रप्ति होती है। सिर्फ मानव जीवन ही नहीं सभी जीव जंतुओं के जीवन में भी संघर्ष होता है। संघर्ष करना ही मानव जीवन का कर्तव्य है। अक्सर हम यह देखते हैं कि जो जीवन में समृद्धशाली, बुद्धिमान, एवं कर्तव्यनिष्ठ होते हैं, वे अपने जीवन मे हमेशा संघर्षशील होते हैं। संघर्ष से ही उससे सही गलत पता चलता है। जब प्रातःकाल जंगल में शेर जागता है तो वह सोचता है कि यदि आज मैं संघर्षसहित शिकार नहीं किया तो भूखा रह जाऊँगा। उसी विपरीत एक हिरण सोचता है यदि आज मैं अपने पूरे संघर्ष के साथ नहीं भागा तो मारा जाऊँगा। यह छोटी सी बातें हमें यह सिखलाती है,कि मनुष्य से लेकर जीव-जंतुओं तक सभी को अपने जीवन में संघर्ष करना पड़ता है। संघर्ष के माध्यम से ही हमें अपने जीवन में फल की प्राप्ति कर सकते हैं। अर्थात संघर्ष का दूसरा नाम कर्म है। अतः हमें संघर्षसहित अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए। हमें संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसका डटकर मुक़ाबला करना चाहिए। जो व्यक्ति अपने जीवन में संघर्षों का डटकर मुकाबला करता है,...

बच्चों प्रति अभिभावक एवं शिक्षक का बर्ताव

इस कहानी में एक बच्चे की कहानी को दर्शया गया है। जिसका नाम इसान होता है। वह बच्चा करीब 8 या 9 वर्ष का होता है। उसके माता-पिता उसे सारी सुख-सुविधायें देते हैं। परतुं वह पढ़ नहीं पाता, शायद इसान के माता-पिता उसके अंदर की कमी को नही समझ पाते हैं। इसान बचपन से ही कुछ अलग सा रहता है। वह आम बच्चों की तरह नहीं रहता है। इसान बचपन से ही अक्षर को अच्छे से पढ़ नहीं पाता था, क्योंकि इसान को कोई भी अक्षर एक जगह स्थिर नहीं देख पाता था। शायद यह कमी इसान के माता-पिता नहीं पाए,पर इसान के अच्छे अंक नहीं आते थे। उसे माता-पिता के तरफ से डांट सुनने को मिलती थी। इसान डाँट सुनकर-सुनकर चिड़चिड़ा सा हो गया था। कुछ दिनों पश्चात वह अपने माता-पिता की बात सुननी बिल्कुल बन्द कर दी। इसान को अकेलापन सा महसुस होने होने लगा था। उसे इस बात का भी दुख रहता था, कि मैं आम बच्चों की तरह क्यों नहीं पढ पाता, पर कहते हैं कि हर इन्सान में कुछ न कुछ खूबियां होती है। इसान में भी चित्रकला करने की बहुत अच्छी खूबी थी। जब इसान शिकायतें ज्यादा होने लगी तो माता-पिता उसे छात्रावास डाल दिए। इसान वहाँ जाते ही लगा जैसे टूट गया हो उसे अब कोई सा...

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती : सोहनलाल द्विवेदी

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है मन का विश्वास रगों में साहस भरता है चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती