जीवन एक श्यामपट्ट
जैसा कि हम सभी जानते हैं,कि अधिकांश मनुष्य का जीवन दीर्घायु नहीं होता परन्तु संघर्षशील, सुखद एवं दुखद जरूर होता है। मनुष्य के जीवन में सुख एवं दुखों का उतार चढ़ाव होना तो मनुष्य जीवन का एक अनमोल रिश्ता है। सुख एवं दुख के कारण ही हर मनुष्य अच्छे एवं बुरे वक़्त से रूबरू हो पाता है। मनुष्य का जीवन एक रिक्त श्यामपट्ट की भांति होता है। इसे हम मनुष्य मनुष्य जीवन काल रेखा या फिर मनुष्य जीवनी रेखा भी कह सकते हैं। मनुष्य अपने अच्छे एवं बुरे कर्म इसी जीवनरूपी श्यामपट्ट के ऊपर पूरा करता है। यदि कोई मनुष्य अपने जीवनरूपी श्यामपट्ट पर अच्छे कर्म करता है ,तो उसे अपना रास्ता सफल एवं प्रकाशमय दिखाई देता है,परन्तु जो मनुष्य अपने जीवनरूपी श्यामपट्ट पर बुरे कर्म करता है तो उसे अपना रास्ता असफल एवं अंधकारमय दिखाई देता है। यह सत्य है ,कि कर्मों के फल की प्राप्ति मनुष्य के वश में नहीं होता परन्तु इतना तो सत्य है कि अच्छे एवं बुरे कर्म करना मनुष्य के वश में ही होता है। अर्थात मनुष्य को अपने जीवनरूपी श्यामपट्ट के रिक्त स्थानों की पूर्ति अपने अच्छे कर्मों के माध्यम से करनी चाहिए। जब एक छोटे शिशु क...