बच्चों प्रति अभिभावक एवं शिक्षक का बर्ताव

इस कहानी में एक बच्चे की कहानी को दर्शया गया है। जिसका नाम इसान होता है। वह बच्चा करीब 8 या 9 वर्ष का होता है। उसके माता-पिता उसे सारी सुख-सुविधायें देते हैं। परतुं वह पढ़ नहीं पाता, शायद इसान के माता-पिता उसके अंदर की कमी को नही समझ पाते हैं। इसान बचपन से ही कुछ अलग सा रहता है। वह आम बच्चों की तरह नहीं रहता है। इसान बचपन से ही अक्षर को अच्छे से पढ़ नहीं पाता था, क्योंकि इसान को कोई भी अक्षर एक जगह स्थिर नहीं देख पाता था। शायद यह कमी इसान के माता-पिता नहीं पाए,पर इसान के अच्छे अंक नहीं आते थे। उसे माता-पिता के तरफ से डांट सुनने को मिलती थी। इसान डाँट सुनकर-सुनकर चिड़चिड़ा सा हो गया था। कुछ दिनों पश्चात वह अपने माता-पिता की बात सुननी बिल्कुल बन्द कर दी। इसान को अकेलापन सा महसुस होने होने लगा था। उसे इस बात का भी दुख रहता था, कि मैं आम बच्चों की तरह क्यों नहीं पढ पाता, पर कहते हैं कि हर इन्सान में कुछ न कुछ खूबियां होती है। इसान में भी चित्रकला करने की बहुत अच्छी खूबी थी। जब इसान शिकायतें ज्यादा होने लगी तो माता-पिता उसे छात्रावास डाल दिए। इसान वहाँ जाते ही लगा जैसे टूट गया हो उसे अब कोई सा भी काम में मन सा नहीं लगता था। यहाँ तक कि चित्रकला में भी, एक दिन उस विद्यालय में एक नए चित्रकला के शिक्षक की नियुक्ति हुई। उन्होंने इसान के बारे में बचपन से आजतक की सारी बातों का पता लगाया। वह शिक्षक समझता था कि इसान के अन्दर जो कमी है, उसे अगर हटाने की कोशिश करे तो इसान भी आम बच्चों की तरह अच्छे से पढ़ लिख सकता है। और फिर क्या उस शिक्षक ने इसान की मदद की उसके अंदर की कमी को समझा और उस बच्चे में जो खूबी थी। उसके बाहर निकालने की फिर से कोशिश किया। अतः इसान भी आम बच्चों की तरह प्रगति की मार्ग को छूता चला गया।

उद्देश्य:- हमें इस कहानी से सीखने को मिलती है,कि किसी भी इंसान को बिना सोचे समझे उसकी तुलना नहीं करनी चाहिए। अगर उसमें में कोई कमी है तो हमें उनकी कमी को समझना चाहिए। 

                                 धन्यवाद!!!☺️

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