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परिवेश का बदलाव

एक छोटा सा गाँव भिन्न प्रकार के लोग कुछ जातियों में बंधे हुए  तो कुछ गरीबी रेखाओं में कुछ लोगों का बोलबाला तो कुछ लोगों का सिर्फ नाम मात्र अधिकतर लोगों का ईश्वर पर अटूट विश्वास तो कई लोग संकट में अपने क़िस्मत और प्रभु को कोसते हुए क्या ये बदलाव नहीं है? तो फिर बदलाव है क्या?? किस चिड़िया का नाम है ये बदलाव तो क्या लोगों की अलग - अलग सोचना है बदलाव.... तो क्या लोगों की अलग- अलग भाषा अपनाना है बदलाव.... तो क्या लोगों की अलग-अलग पहनावा अपनाना है बदलाव.... इन सभी पहलुओं को देखा तो हमें बदलाव लगा पर क्या सचमुच में है बदलाव ???? बदलाव परिभाषित करना बहुत आसान है पर एकरूपता को परिभाषित करना थोड़ा सा कठिन सूरज का पूरब से उगना और पश्चिम में डूबना ये तो हमने बचपन से देखा है ,क्या इसमें भी बदलाव है? जी नहीं कहें तो बिल्कुल भी नहीं उनका स्वभाव वैसा का वैसा ही है। तो फिर दिन-प्रतिदिन एक छोटे से गाँव में इतनी सारी बदलाव क्यों ?? एक घरों में एक से ज्यादा चूल्हों का जलना एक घरों में एक से ज्यादा निर्णयों का पनपना कुछ-कुछ दिनों में मनमुटावों को मेहमानों की तरह हर एक घरों में दस्तक देना। अन्ततः मैं इतना...

ईश्वर की भेंट

 ईश्वर जिन्हें जिम्मेदारी देता है उन्हें कन्धा भी देता है_____ ईश्वर जिन्हें पेट देता है उन्हें भूख भी देता है।_____ ईश्वर जिन्हें थकान देता है उन्हें नींद भी देता है_____ ईश्वर जिन्हें रास्ता देता है उन्हें मंज़िल भी देता है____ ईश्वर जिन्हें संकट देता है उन्हें हल भी देता है____ ईश्वर जिन्हें दुःख देता है उन्हें सुख भी देता है____ अंततः ईश्वर जिन्हें जन्म देता है उन्हें मृत्यु भी देता है..…...... __धन्यवाद🙏_________________ ___________________ ____________________सर्वशक्तिमान

ईमानदारी का परिचय

चाहते हुए भी आशु अपने ईमानदारी का परिचय नहीं दे पाया। यह कहानी भी कुछ इस तरह प्रारंभ होती है। कोयले के व्यपारी का एक भरा-पूरा परिवार था।उनकी धर्मपत्नी लता एवं उनका इकलौता बेटा चन्ना ।   आशु उस व्यपारी के हवेली का दरबान था परन्तु रामचरण उसे ऐसा महसूस नहीं होने दिये कि वह केवल दरबान है बल्कि आशु को अपने घर का एक अभिन्न शदस्य मानते थे। समय बीतता गया सरकारें बहुत से व्यपारों पर लगाम कसती चली गयी। रामचरण के व्यपार पर भी इसका प्रभाव पड़ा। जिस कारण रामचरण का व्यपार मानो दिन प्रतिदिन नम होता चला गया। रामचरण के बहुत से कोशिशों के बाबजूद भी वह अपने व्यपार पर पहले की तरह धाक नहीं जमा पाया। दुर्भाग्यपूर्ण दीपों का त्योहार बहुत नजदीक था। बहुत से घरों में दियों की रोशनी जगमगा रही थी आँगन में चहल-पहल थी। परन्तु रामचरण अंदर स टूट रहा था मानो उन दिओं की रोशनी उसे धिक्कार रही हो। और वहीं कहीं उनका इकलौता लड़का चन्ना आशु के साथ अपनी जीवन जीने में लगा पड़ा था। आशु हर तरह से चन्ना का ख्याल रख रहा था बस यही बात रामचरण को सुकून देती थी और वो अपने से कहीं ज्यादा आशु की परिवरिश को तबज्जो देता था। और कहीं न कह...