परिवेश का बदलाव

एक छोटा सा गाँव

भिन्न प्रकार के लोग

कुछ जातियों में बंधे हुए

 तो कुछ गरीबी रेखाओं में

कुछ लोगों का बोलबाला

तो कुछ लोगों का सिर्फ नाम मात्र

अधिकतर लोगों का ईश्वर पर अटूट विश्वास

तो कई लोग संकट में

अपने क़िस्मत और प्रभु को कोसते हुए

क्या ये बदलाव नहीं है?

तो फिर बदलाव है क्या??

किस चिड़िया का नाम है ये बदलाव

तो क्या लोगों की अलग - अलग सोचना है बदलाव....

तो क्या लोगों की अलग- अलग भाषा अपनाना है बदलाव....

तो क्या लोगों की अलग-अलग पहनावा अपनाना है बदलाव....

इन सभी पहलुओं को देखा तो हमें बदलाव लगा

पर क्या सचमुच में है बदलाव ????

बदलाव परिभाषित करना बहुत आसान है

पर एकरूपता को परिभाषित करना थोड़ा सा कठिन

सूरज का पूरब से उगना और पश्चिम में डूबना ये तो हमने बचपन से देखा है ,क्या इसमें भी बदलाव है?

जी नहीं कहें तो बिल्कुल भी नहीं उनका स्वभाव वैसा का वैसा ही है।

तो फिर दिन-प्रतिदिन एक छोटे से गाँव में इतनी सारी बदलाव क्यों ??

एक घरों में एक से ज्यादा चूल्हों का जलना

एक घरों में एक से ज्यादा निर्णयों का पनपना

कुछ-कुछ दिनों में मनमुटावों को मेहमानों की तरह हर एक घरों में दस्तक देना।

अन्ततः मैं इतना ही कहना चाहूंगा समय के साथ बदलाव/परिवर्तन जरूरी है पर इतना भी नहीं कि हम अपनी संस्कृति को भूल जाए 

इतना भी नहीं की हम अपनी मर्यादा को भूल जाए

इतना भी नहीं कि हम अपने एकरूपता को भूल जाए

इतना भी नहीं कि हम अपने सोच को संकुचित करते जाए 

इतना भी नहीं एक- दूसरे से अपनापन मिटता जाए ।

और इस पहल का शुरुआत हम अपने देश के छोटे से गाँवों से करना होगा।

सभी को साथ लेकर चलना होगा विभन्नता होने के बाबजूद भी हमें एकरूपता बनाए  रखना होगा।


🌻_____धन्यवाद🙏





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